
नीमच 7 जनवरी 2026,
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (ए.आई.) की मदद से स्कूली छात्र आत्मनिर्भर बन रहे है। जावद क्षेत्र के 27 स्कूलों में ए.आई.की कक्षाए संचालित हो रही है। इन कक्षाओं में 1400 विद्यार्थी ए.आई.की शिक्षा हासिल कर रहे है। ए.आई.से सीखने, समझने का तरीका बदल गया है। यह पाठ्यक्रम 6 माह में पूरा हो जाएगा। इसके बाद विद्यार्थी घर बैठे दो से तीन घंटे ए.आई.का उपयोग कर प्रतिमाह 10 से 15 हजार रूपये की कमाई कर सकेंगे। आत्मनिर्भर बन पाएंगे। यह बात जावद क्षेत्र के विधायक श्री ओमप्रकाश सखलेचा ने बुधवार को सांदीपनी विद्यालय जावद में महाराष्ट्र नालेज कारर्पोरेशन लिमिटेड के सहयोग से पत्रकारिता में ए.आई. का बेहतर उपयोग करने के संबंध में आयोजित जिला स्तरीय पत्रकार कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कही।
इस मौके पर महाराष्ट्र नॉलेज कॉरपोरेशन लिमिटेड, के श्री मयूर हवलदार, मल्टीपल सिटी कंपनी के सीईओ श्री नितिकेश भटकर एवं जिले के पत्रकारगण उपस्थित थे।
कार्यशाला में श्री मयूर हवलदार ने पीपीटी के माध्यम से ए.आई. के उपयोग पर आधारित प्रेजेंटेशन दिया। इसमें जेमीनी, चेट जीपीटी, फेक्ट चेक, सुन डॉट एआई, भाषणी एप्प, गूगल, एम.एस.आफिस, ईमेल, आउट लुक ईमेल के उपयोग के बारे में समझाया। उन्होने संपादकीय, खेल, विज्ञान, डिजिटल, फोटो और कार्टून पत्रकारिता जैस विषयों पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला में वर्चुअल और इन-पर्सन लर्निंग सेशन की सीरीज़, न्यूज़रूम में ए.आई.टूल्स को शामिल करने के खास तरीकों, ऑडियंस एंगेजमेंट, हेडलाइन जेनरेशन, इलेक्शन रिपोर्टिंग, डेटा जर्नलिज़्म और ग्रोथ स्ट्रैटेजी के लिए एप्लीकेशन के बेहतर उपयोग के बारे में भी बताया गया।
कार्यशाला में बताया गया, कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या कृत्रिम बुद्धिमत्ता से कंप्यूटर और मशीनों को इंसानों की तरह सोचने, सीखने, समझने, निर्णय लेने और समस्याओं को हल करने की क्षमता देने वाली तकनीक है। यह डेटा का विश्लेषण करके पैटर्न पहचानता है और इंसानों की तरह काम करता है, जैसे Siri/Alexa, फेस अनलॉक और सेल्फ-ड्राइविंग कारें इसके उदाहरण हैं, जो पैटर्न पहचानने, भाषा समझने और खुद काम करने में सक्षम होती हैं, जैसे कि जेनरेटिव AI (ChatGPT) टेक्स्ट और इमेज बनाता है।
इस प्रशिक्षण कार्यशाला में बताया गया, कि आज के ज़माने में, जहाँ जानकारी तेज़ी से फैलती है और गलत जानकारी भी फैलती है, ए.आई. एडवांस, फैक्ट-चेकिंग पत्रकारिता के कंटेंट की विश्वसनीयता और ईमानदारी बनाए रखने के लिए एक ज़रूरी टूल है।
एआई टूल भरोसेमंद डेटाबेस, साइंटिफिक जर्नल और पहले से वेरिफाइड खबरों के साथ आर्टिकल में किए गए दावों को क्रॉस-रेफरेंस करके वेरिफिकेशन प्रोसेस को आसान बनाते हैं। यूके में फुल फैक्ट जैसे ऑटोमेटेड फैक्ट-चेकिंग प्रोग्राम, लाइव खबरों और पब्लिक डिबेट पर नज़र रखने के लिए ए.आई. का इस्तेमाल किया जाता हैं और गलत दावों को तुरंत ह्यूमन रिव्यू के लिए फ्लैग किया जाता हैं। यह न केवल फैक्ट-चेकिंग की स्पीड और स्केल को बढ़ाता है, बल्कि पत्रकारों को सटीकता के ऊंचे स्टैंडर्ड बनाए रखने में भी मदद करता है, जो जनता के भरोसे के लिए बहुत ज़रूरी है। कार्यशाला में नीमच जिले के विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में उपस्थित प्रिंट, इलेक्ट्रानिक एवं डिजीटल मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित थे।


