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//सफलता की कहानी//

प्रशासन के सहयोग से प्रसूता को मिला पुनर्जीवन

नीमच 9 अगस्‍त 2025,

मुख्‍य चिकित्‍सा अधिकारी डॉ.आर.के.खद्योत ने बताया, कि राजस्थान राज्य के कुआंखेडा जिला चित्तौडगढ़ की संतोष पति प्रकाश भील जो, कि बोलने और सुनने में असमर्थ है, जिसका संभावित प्रसव 28 अगस्त 2025 को होना था। उक्त महिला 27 जुलाई 2025 को प्रसव पीडा के साथ सिविल अस्पताल रामपुरा पहुंची, जहा पर महिला की स्थिति असचेत थी। सिविल अस्पताल रामपुरा में महिला का डॉ. ने परीक्षण किया। महिला को प्री-टर्म एवं झटके आ रहे थे, रक्तचाप नापने पर 200/110 आ रहा था। महिला को एक्लेम्पसिया के साथ ही प्रसव पूर्व रक्तस्त्राव होने के कारण डॉ. प्रमोद पाटीदार, डॉ अभिषेक चौहान व पेरामेडिकल स्टाफ ने महिला का सम्पूर्ण प्राथमिक उपचार करते हुए जिला चिकित्सालय नीमच रेफर किया तथा जिला सुमन हेल्प डेस्क सुपरवाईजर श्री अरविन्द शर्मा को सूचना दी।

महिला को 108 के माध्यम से रैफर किया गया। जिसका प्रसव ई. एम.टी 108 द्वारा रामपुरा और मनासा के बीच रास्ते में ही एम्बुलेंस में सुरक्षित प्रसव करवाया गया, जिसमे प्री-टर्म फिमेल वाइल्ड आई यू डी हुआ। महिला की स्थिति लगातार बिगडती जा रही थी, 108 के माध्यम से उक्त महिला को तत्काल जिला चिकित्सालय में भर्ती करवाया गया। जहाँ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नितीन जैन द्वारा महिला का ईलाज प्रारंभ किया गया, किन्तु मेटरनल आई सी.यू. नहीं होने से महिला की जान का खतरा था। इसको समझते हुए डॉ. जैन ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ आर.के.खद्योत से चर्चा कर, ज्ञानोदय मल्टीस्पेशिलीटी हास्पिटल में इस महिला हेतु मेटरनिटी आई.सी.यू उपयोग करने की स्वीकृति प्राप्त कर महिला को तत्काल ज्ञानोदय हास्पिटल शिफ्ट किया। जहाँ ज्ञानोदय हास्पिटल के चिकित्सकों ने महिला का उपचार किया तथा महिला की जान बचाई। उक्त महिला के परिजनों को सभी प्रकार की समझाईश एवं दवाई देकर समय-समय पर नजदीकी अस्पताल में दिखाने को कहा। महिला को स्वस्थ्य होने पर 4 अगस्त 2025 को डिस्वार्ज किया गया। इस प्रकार प्रशासन के सहयोग से स्‍वास्‍थ्‍य विभाग द्वारा निजी क्षेत्र की सुविधाओं का उपयोग कर मातृ मृत्यु होने से बचाया गया हैं।

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