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पशुधन से समृद्धि की ओर बढ़ता नीमच आधुनिक डेयरी व्यवसाय बना ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई रीढ़

नीमच 06 अक्‍टूबर 2026

कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा के मार्गदर्शन में जिले में आधुनिक डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देने के प्रयासों को लगातार गति मिल रही है। आधुनिक डेयरी आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है। मध्यप्रदेश में दूध उत्पादन को बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संकल्प को साकार करने में नीमच जिला महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जिले में प्रतिदिन करीब 9 लाख 87 हजार लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है और 6.4 प्रतिशत की वार्षिक विकास दर के साथ डेयरी क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है।

पशुपालन विभाग की डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना और मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना किसानों और युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर रही हैं।

नौकरी के बजाय गांव में शुरू किया डेयरी व्यवसाय

उपरेड़ा गांव के कुलदीप ने डिग्री हासिल करने के बाद शहर में नौकरी करने के बजाय गांव में ही अपना व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। आर्थिक संसाधनों की कमी उनके सामने बड़ी चुनौती थी, लेकिन डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना से मिले सहयोग ने उनके सपने को नई उड़ान दी। योजना के तहत 25 उन्नत नस्ल के दुधारू पशुओं की डेयरी इकाई स्थापित करने की दिशा में उन्होंने कदम बढ़ाया। वर्तमान में उनके फार्म पर सात पशुओं से करीब 70 लीटर प्रतिदिन दूध उत्पादन हो रहा है और वे भविष्य में इसे बढ़ाकर करीब 250 लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

मेहनत और परिवार के सहयोग से बढ़ा कारोबार

नीमच के किशोर पाटीदार ने भी शासकीय योजना का लाभ लेकर अपना डेयरी फार्म शुरू किया। पशुओं की देखभाल, खान-पान और फार्म के संचालन में उनकी पत्नी ललिता पाटीदार भी कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग कर रही हैं। कुछ पशुओं से शुरू हुआ उनका कारोबार आज करीब 120 लीटर प्रतिदिन दूध उत्पादन तक पहुंच गया है। परिवार अब इसे और विस्तार देकर 400 से 500 लीटर प्रतिदिन दूध उत्पादन का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है।

दो पशुओं से शुरू हुआ सफर, अब विस्तार का संकल्प

ग्राम जनकपुर के अक्षय के लिए मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना बदलाव का माध्यम बनी। उन्नत नस्ल के दुधारू पशुओं ने उनके दूध उत्पादन और आय को बढ़ाने का रास्ता खोला। अब उनका लक्ष्य दो पशुओं से चार, चार से छह और आगे लगातार अपने डेयरी व्यवसाय का विस्तार करना है। परिवार भी इस कार्य में उनका पूरा सहयोग कर रहा है।

मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना के माध्यम से छोटे पशुपालकों को उन्नत नस्ल के दुधारू पशु उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कृत्रिम गर्भाधान और बेहतर ब्रीडिंग से पशुपालक धीरे-धीरे अपने पशुधन को बढ़ाकर डेयरी व्यवसाय को मजबूत कर रहे हैं।

दूध के साथ जैविक खेती से अतिरिक्त आय

डेयरी व्यवसाय का लाभ केवल दूध उत्पादन तक सीमित नहीं है। पशुपालक गोबर से वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत और गोमूत्र से जैविक कीटनाशक जैसे उत्पाद तैयार कर रहे हैं। इससे खेती की लागत कम होने के साथ अतिरिक्त आय के अवसर भी बढ़ रहे हैं।

योजनाओं से मिल रहा सीधा आर्थिक संबल

डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना के अंतर्गत नीमच जिले में स्वीकृत प्रकरणों में उच्च नस्ल के पशु उपलब्ध कराकर डेयरी इकाइयों का संचालन शुरू कराया जा रहा है। 25 दुधारू संकर गाय अथवा भैंस की इकाई के लिए 42 लाख रुपये, जबकि देशी गायों की इकाई के लिए 36 लाख रुपये की लागत निर्धारित है।

वहीं मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना के तहत 2.95 लाख रुपये की इकाई पर सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को 50 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। जिले में अब तक 55 हितग्राहियों को 110 दुधारू पशु उपलब्ध कराए जा चुके हैं।

पशुपालन विभाग द्वारा इन डेयरी इकाइयों को तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि सफल इकाइयों को रोल मॉडल के रूप में विकसित किया जा सके और आसपास के किसान उनसे प्रेरणा लेकर अपना डेयरी व्यवसाय शुरू कर सकें।

नीमच में योजनाओं का प्रभाव पशुपालकों की बढ़ती आय और डेयरी व्यवसाय के विस्तार में दिखाई दे रहा है। हितग्राहियों ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं से उन्हें गांव में ही रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता का अवसर मिला है।

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