देशशहर

जिले के सभी चिकित्‍सकों की कार्यशाला सम्‍पन्‍न जिला प्रशासन ने स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं की बेहतरी के लिए अभिनव नवाचार किया

जिले के नागरिकों को बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं उपलब्‍ध कराने में स्‍वास्‍थ्‍य अमले का अहम योगदान है- श्री चंद्रा

नीमच 9 फरवरी 2026,

जिले के नागरिकों को बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं सुविधाए उपलब्‍ध कराने में सभी चिकित्‍सकों और स्‍वास्‍थ्‍य अमले का अहम योगदान रहा है। जिले में स्‍वास्‍थ्‍य सेवाए और सुदृढ हो, आपातकालीन स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं तत्‍परतापूर्वक उपलब्‍ध हो। मातृ एवं शिशु मृत्‍यु दर में कमी लाई जा सके तथा सड़क दुर्घटनाओं में पीडितों को त्‍वरित उपचार मिले और जनहानि कम हो। इस उद्देश्‍य को ध्‍यान में रखते हुए जिला प्रशासन द्वारा स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण तथा चिकित्‍सा शिक्षा विभाग के संयुक्‍त तत्‍वावधान में नीमच में रविवार को ” आपातकालीन सेवाओं के सुदृढीकरण विषय पर जिले के चिकित्‍सकों की एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।

कलेक्‍टर श्री हिमांशु चंद्रा, जिला पंचायत सीईओ श्री अमन वैष्‍णव, मेडिकल कालेज नीमच के डीन डॉ.आदित्‍य बैराल, आईएमए अध्‍यक्ष डॉ.मनीष चमडिया, मुख्‍य‍ चिकित्‍सा अधिकारी डॉ.दिनेश प्रसाद, सिविल सर्जन डॉ.महेन्‍द्र पाटिल आदि ने मां सरस्‍वती के चित्र पर माल्‍यार्पण एवं दीप प्रज्‍जवलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया।

कार्यशाला के शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए कलेक्‍टर श्री चंद्रा ने कहा, कि गर्भवती महिलाओं एवं हाईरिस्‍क गर्भवती महिलाओं का बेहतर प्रबंधन, मातृ एवं शिशु मृत्‍यु दर में कमी लाने के लिए सामुहिक प्रयास किए जा रहे है। इसमें सभी चिकित्‍सक एवं स्‍वास्‍थ्‍य अमले द्वारा बेहतर कार्य किया जा रहा है। उन्‍होने कहा, कि इस कार्यशाला से सभी को कुछ ना कुछ नया सीखने को मिलेगा।

इस कार्यशाला में आपातकालीन सेवाओं के सुदृढ़ीकरण: चिकित्सकों को आपातकालीन स्थितियों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करने के लिए विस्‍तार से जानकारी दी गई।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य: गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की देखभाल में सुधार के लिए विशेष सुझाव दिए गए।

दुर्घटना प्रबंधन: दुर्घटनाओं में घायलों को प्राथमिक उपचार और सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने के लिए रणनीतियाँ साझा की गईं।

सामुदायिक जागरूकता: कार्यशाला में स्थानीय समुदाय को आपातकालीन सेवाओं के बारे में जागरूक करने पर भी जोर दिया गया।

कार्यशाला में आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार, मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी, दुर्घटना पीड़ितों के लिए समय पर सहायता सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सकों को आपातकालीन सेवाओं में दक्षता बढ़ाने और जन-जन तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यशाला के प्रथम सत्र स्‍त्री रोग विशेषज्ञ में डॉ.लाड़ धाकड़ ने उच्‍च जोखिम गर्भवती महिलाओं का प्रबंधन जांच एवं उपचार डा.प्रियंका जोशी ने ए.एन.सी./पी.एन.सी.देखभाल एवं प्रसव के दौरान देखभाल, एस.एन.सी.यू.प्रभारी एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.प्रशांत राठौर ने नवजात शिशुओं की देखभाल एवं उपचार, डॉ.योगेन्‍द्र धाकड़ ने निमोनिया/डायरिया से बचाव सुरक्षा एवं उपचार, के बारे में प्रजेन्‍टेशन के माध्‍यम से विस्‍तार से जानकारी दी।

कार्यशाला में द्वितीय सत्र में डॉ.सतीश चौधरी ने सांप, कुत्‍ता और जानवर काटने पर जांच उपचार एवं प्रबंधन, डॉ.विनय वर्मा ने विषक्‍तता जहर के प्रकरणों में प्रबंधन एवं उपचार, डॉ.यशवंत पाटीदार ने सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की देखभाल एवं उपचार प्रबंधन विषय पर विस्‍तार से जानकारी दी। डॉ.विधि पटेल ने हेड इंजरी, डॉ.विजय भारती ने मेडिको लीगल पहलुओं के बारे में बताया। मुख्‍य चिकित्‍सा अधिकारी डॉ.दिनेश प्रसाद एवं सिविल सर्जन डॉ.महेन्‍द्र पाटील, मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ.आदित्‍य बैराल ने कार्यशाला/कार्यक्रम का मूल्‍यांकन किया और इसे काफी उपयोगी बताया। कार्यशाला में उपस्थित प्रतिभागियों के प्रश्‍नों, जिज्ञासाओं का विशेषज्ञों द्वारा समाधान भी किया गया।

प्रारंभ में अतिथियों ने मां सरस्‍वती के चित्र पर दीप प्रज्‍जवलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। डॉ.दिनेश प्रसाद, डॉ.महेन्‍द्र पाटील, डॉ.मनीष यादव, डॉ.विजय भारती, आई.एम.ए.के सचिव डॉ.आदित्‍य भण्‍डारी, पूर्व आई.एम.ए.अध्‍यक्ष डॉ.अशोक जैन, डॉ.आर.पी.माहेश्‍वरी ने अतिथियों का स्‍वागत किया।

कार्यशाला में जिले के सभी शासकीय चिकित्‍सक, निजी चिकित्‍सक एवं आई.एम.ए.के पदाधिकारी एवं सदस्‍यगण स्‍वास्‍थ्‍य विभाग का अमला आदि उपस्थित थे।

 

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